CBSE, ICSE or State Board के बीच अंतर

 What is the difference between CBSE, ICSE  
and  State Board

CBSE, ICSE और राज्य बोर्ड के बीच अंतर

आज की इकाइसवी सदी में हम देख रहे है की शिक्षा के छेत्र में व्यापक परिवर्तन आ रहे है । शहरों से लेकर गावं तक सभी माता पिता अपने बच्चों की शिक्षा को लेकर काफी जागरूक हो गए है और वे सभी चाहते है की उनके बच्चों को उत्तम और सबसे अच्छी और भविष्य निर्माण करने वाली शिक्षा प्राप्त हो सके, उसके लिए वे हर संभव कोशिश करने को तैयार है । एक समय कुछ दशकों पहले ग्रामीण अंचलो के बच्चे उच्च स्तरीय शिक्षा से वंचित रह जाते थे| लेकिन आज के इस स्वर्णिम भारत देश में गांव हो या शहर / किसान हो या पूंजीपति या मजदुर चाहे वो किसी भी कार्य छेत्र से जुड़ा हो वो अपने बच्चो को उत्तम और सर्वोच्च शिक्षा प्रदान करवाना चाहता है ।

अब इसमें एक तथ्य ये आता है की शिक्षा के भी प्रकार है और उनके अलग माध्यम है जो की अलग-अलग स्तर पर काम करते है ।

कुछ शिक्षा के माध्यम आसान है और कुछ शिक्षा के माध्यम कठिन है जो की बच्चों के उज्वल भविष्य का निर्माण करते है । जहा तक में समझ पाया हु हम लोगो में से इस विषय में बहुत कम लोग चर्चा करते है ।

 जिनके इर्द गिर्द बचपन की पढाई शुरू और माध्यमिक या उच्तर माध्यमिक पर जाकर खत्म हो जाती है । जो की किसी भी बालक अथवा बालिका के प्राथमिक अध्यन का आधार प्रदान करती है, एक तरह से यही उसकी जीवन की नींव होती है जो उसे मजबूत और जीवन में आने वाले संघर्ष से लड़ने योग्य बनती है ।  दूसरे शब्दों में प्रतियोगिता परीक्षा या सरकारी विभागों में नौकरी के लिए प्रतियोगिता परीक्षाओ में अच्छे अंक लाने या उसमे चयनित होने से भी है ।

तीन प्रमुख शिक्षा के माध्यम जो जाने जाते है

1. स्टेट बोर्ड (राजकीय शिक्षा मंडल) उदाहरण :- मप्र शिक्षा बोर्ड , राजस्थान शिक्षा बोर्ड, उतर प्रदेश शिक्षा बोर्ड इत्यादि |

2. CBSC बोर्ड (Central Board of Secondary Education) केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड |

3. ICSE बोर्ड (Indian Certificate of Secondary Education) भारतीय माध्यमिक शिक्षा प्रमाणपत्र / COUNCIL FOR THE INDIAN SCHOOL CERTIFICATE EXAMINATIONS / भारतीय स्कूल सर्टिफिकेट परीक्षाओं के लिए पाठ्यक्रम |

 ये तीनो ही मुख्यतः शिक्षा के माध्यम प्रचलित है या यूँ कहे की इनके विषय में अधिकांश लोगो तक जानकारी है । जहाँ तक में ग्रामीण छेत्र की बात करूं तो कुछ ही ऐसे लोग होंगे जो इन सभी बातो को अच्छे से समझते और जानते होंगे । क्युकी अधिकांश माता पिता को तो यही पता है की बस हमारा बालक अथवा बालिका अच्छी शिक्षा प्राप्त करे उन्हें माध्यम या उससे होने वाले लाभ का भी कोई पता नहीं होता । हम आपको इन अलग अलग माध्यम और इनकी पढाई और इनसे जुड़े सभी तथ्यों को आपको विस्तार पूर्वक समझायेंगे इस पोस्ट को अंत तक पढ़े और सम्पूर्ण जानकारी से अवगत हो जाएँ।

 CBSE, ICSE and State बोर्ड से जुड़े कुछ खास बातें

1. CBSE और ICSE दोनों ही पाठ्यक्रम सम्पूर्ण भारत में पढ़ाये जाते है । यहाँ दोनों पाठ्यक्रम प्रत्येक राज्य में है जो की इनके नाम से भी स्पष्ट हो जाता है । लेकिन राज्य बोर्ड या पाठ्यक्रम जैसा की हमने आपको बताया यह सिर्फ एक राज्य तक सिमित होता है और अलग अलग राज्य में ये बदल जाता है ।

 2. CBSE पाठ्यक्रम अंग्रेजी एवं हिंदी दोनों माध्यम में होता है । ICSE सिर्फ अंग्रेजी में ही होता है । राजकीय पाठ्यक्रम हिंदी / अंग्रेजी अथवा राज्य की मूल भाषा में भी हो सकता है ।

 3. CBSE और ICSE के पाठ्यक्रम में सम्पूर्ण राष्ट्र एवं अंतर्राष्ट्रीय ज्ञान समाहित होता है ।  जबकि राज्य पाठ्यक्रम में राज्य से सम्बंधित और राष्ट्रिय ज्ञान दिया जाता है राज्य पाठ्यक्रम इन दोनों की अपेक्षा काफी सरल माना जाता है।

 4. ICSE के पाठ्यक्रम के स्कूल राज्य के दृष्टिकोण अथवा राष्टीय स्तर पर बहुत कम है । लेकिन इनकी तुलना में CBSE स्कूल अधिक है और लोकप्रिय है चाहे आप इन्हे राज्य स्तर पर देखे या राष्ट्रिय स्तर पर इनकी संख्या बहुत अधिक है।  वही राज्य बोर्ड या पाठ्यक्रम के स्कूलों की संख्या हर राज्य में सरकारी एवं प्रावेट स्कूल के रूप में इन दोनों से संख्या में कही ज्यादा होती है ।

 4. अगर तुलनात्मक रूप से हम CBSE और ICSE को देखें तो इनमे कोई अधिक अंतर नहीं है । अंतर सिर्फ इतना माना गया है की ICSE का मानक CBSE से थोड़ा ऊचा है । साथ में ऐसा भी माना जाता है की ICSE थोड़ा कठिन है CBSE से । राज्य पाठ्यक्रम बहुत ही सरल और सुगम है इन दोनों की तुलना में|

 6. CBSE पाठ्यक्रम NCRT (राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद) के अनुसार होता है| इसका एक अतिरिक्त फायदा यह है कि, शिक्षा के दूसरे चरण में जाने के लिए होने वाली कई परीक्षाएं जैसे  IIT-JEE, AIEEE आदि प्रवेश परीक्षाओं के लिए यह मूल पाठ्यक्रम है। मेडिकल और इंजीनियरिंग सहित विभिन्न प्रवेश परीक्षाओं की जरूरतों को CBSE पाठ्यक्रम पूरा करता है।

 7. ICSE (CISCE) पाठ्यक्रम हमारे बीच स्कॉटलैंड विश्वविद्यालय के सीनियर स्कूल परीक्षा के समकक्ष लोकप्रिय है। ICSE छात्रों को प्रबंधन, साहित्य और कला विषयों की ओर अधिक मार्गदर्शन कराता है।जिससे छात्रों को TOEFL या छात्रवृत्ति परीक्षा में स्कोर करना आसान हो जाता है। इसका मतलब यह है की अगर किसी छात्र को विदेश में पढ़ने जाना है तो उसे अतिरिक्त उच्च शिक्षा की आवश्यकता नहीं होती। एक रोचक बात यह है की ICSE बोर्ड सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं है, लेकिन इसकी योग्यता को भी विश्व स्तर पर CBSE की तरह स्वीकार किया जाता है। ICSE व्यावहारिक और आंतरिक मूल्यांकन के साथ विस्तृत अध्ययन पर केंद्रित है। ICSE में होने वाली परीक्षाओ के परिणाम सिर्फ परीक्षा में अर्जित किये गए अंको के आधार पर न होकर परीक्षा परिणाम / आंतरिक मूल्यांकन और व्यावहारिक अध्ययन इन तीनो के परिणामों पर विचार करने के बाद परिणाम घोषित किए जाते हैं। निजी उम्मीदवारों को ICSE परीक्षा देने की अनुमति नहीं है। यह पाठ्यक्रम राष्ट्रव्यापी है।

सारांश :-

हमने आपको तीनो ही पाठ्यक्रम के विषय में जानकारी देने का प्रयत्न किया है।  जिसमे सभी को एक स्तर तक हमने समझाने की कोशिश की, मै आशा करता हूँ की आप इसे समझ पाएं होंगे।  स्टेट बोर्ड, CBSE, ICSE तीनों ही बेहतर और अच्छे है लेकिन तीनो में अपनी-अपनी अलग विशेषताएं है, अभिभावकों को अपनी सुविधा और बच्चों के विवेक और सहूलियत के हिसाब से इन्हे चुनना चाहिए।  कई बार माता-पिता बच्चों पर उनके बौद्धिक स्तर से कहीं ज्यादा शिक्षा के स्तर को लेकर भार डाल देते है, जो उचित नहीं है। बच्चे के हिसाब से स्कूल को चुने ताकि वो आपको और खुद को प्रसन्न और खुला हुवा महसूस करे।

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